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Love, Longing, and the Language of Silence 'Bade Achhe Lagte Hain'

झील के किनारे गूँजती हुई वायलीन की उदास धुन हवा में धीमे-धीमे घुल रही है, परंपरा है कि हवा को अभी जाना होगा लेकिन झील को तो वहीं रहना हैं, ये बिछोह तो उसे सहना ही होगा और ये दर्द जैसे केवल हवा और झील का ही नहीं बल्कि उसके किनारे बैठे जोड़े का भी है। वर और वधू दोनों उसके किनारे बैठे हुए हैं और फिर लड़का बहुत हल्के संगीत के साथ धीमे से अपनी बात कह देता है, 'बड़े अच्छे लगते हैं, ये धरती, ये नदिया, ये रैना.... '  लड़की धीमे से पूछती है, 'और ....?' जब वो बोलती है तो पूरा संगीत थम जाता है, उसकी आवाज ही इतनी मधुर है कि उसके सामने संगीत का मौन रह जाना ही ठीक है; स्वर यदि पुरुष के पास हैं उन्हें सँवारने वाला संगीत स्वयं स्त्री है - और अब वही संगीत दूर जा रहा है ....

The Curious Case of the Stolen Dupatta

इन्हीं लोगों ने ले लीन्हा दुपट्टा मेरा ♫♪ ...  गाना सीधा-साधा है, सुनो तो लगता है कि जैसे साहिबज़ान (मीना कुमारी) आरोप लगा रही है कि इन्हीं लोगों ने मेरा दुपट्टा लिया है; शायद बाहर तार पर सूखने के लिए डाला था और इन्हीं में से कोई एक उसे ले गया। लेकिन फिर ध्यान आता है कि वो कह रही है - ले लिया ना कि चुरा लिया; तो क्या ये काम साधिकार किया गया है? क्या उस दुपट्टे के मालिकाना हक को लेकर कोई मसला था? क्या ये एक आरोप ना होकर एक सूचना है? इस अकेली मासूम सी पंक्ति में अब कई परतें नजर आ रही है, और शायद ऐसा ही है भी। किसी कपड़े का दुपट्टा हो जाना, एक दुर्लभ और सम्माननीय यात्रा है, वो सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता और साहिबज़ान उसके कोमल और नाजुक पहलू से हटकर केवल व्यावसायिक पक्ष की बात कर रही है। वो जानती है कि अगर वो ऐसा नहीं करेगी तो मामला जज़्बाती हो जाएगा और फिर तलवारे निकलते देर नहीं लगेगी - वो अभी तलवारों की धार नहीं देखना चाहती, सो एक नए आग्रह के साथ आगे बढ़ती है कि -