Posts

Showing posts with the label Metaphor

The Feast of Life: A Philosophy of the Pangat

Image
 दौड़ कर पंगत में जगह घेर ली है, सांस ज़ोरों की चल रही हो लेकिन खुशी है कि पहला संघर्ष कामयाब रहा; दो साल तक किताबों के पीछे भागने के बाद आखिरकार ठीक-ठाक कॉलेज मिल गया है, खर्चे को लेकर सांस थोड़ी ऊपर नीचे हो गई थी लेकिन खुशी है कि पहली लड़ाई जीत ली।      नमक तो सभी की पत्तल पर रखा जा चुका है अब बस बाकी का इंतज़ार है, तभी हल्की सी हवा चली तो पत्तल उड़ने को बेसब्र हो उठी, जैसे-तैसे उस पर खाली कुल्हड़ धरकर उड़ने से बचाया; पढ़ाई तो खैर सभी की शुरू हो गई है, लेकिन अब बाकी सपनों का इंतज़ार है, इस बीच प्यार का एक छोटा सा झोंका क्या आया कि ज़िंदगी जीने को बेसब्र हो उठी, जैसे-तैसे खाली जेब का बोझ उस पर रखकर बहकने से बचाया। 

The Leader Who Loves the Desert

Image
  अरंडी के पौधों को रेगिस्तान पसंद है। वहाँ उनके लिए कोई चुनौती नहीं होती, दूर-दूर तक ये खतरा नहीं होता कि बड़ी झाड़ियों और विशाल वृक्षों के बीच उन पर किसी की नजर नहीं पड़ेगी - उनके अस्तित्व को एक पहचान मिले इसके लिए रेगिस्तान होना ज़रूरी है ...