लिंकन को वह आग्रह बहुत ही साधारण तरीके से भेजा गया था, आयोजकों को ये कतई उम्मीद नहीं थी कि लिंकन उनका न्योता स्वीकार कर लेंगे; पर लिंकन ने उसे स्वीकार कर लिया। अवसर था गेटिसबर्ग में सैनिकों के राष्ट्रीय समाधिस्थल के समर्पण का। वह गृहयुद्ध जो 6,20,000 सैनिकों की बलि लेने वाला था,अपने चरम पर था। ऐसे समय 1 जुलाई से 3 जुलाई 1863 के बीच गेटिसबर्ग में दोनों पक्षों (यूनियन और कन्फ़ेडरेट्स) के बीच एक बेहद रक्त रंजीत लड़ाई हुई जिसमें दोनों तरफ के कुल 41,112 सैनिक बलिदान हुए। समाधिस्थल इन्ही सैनिकों को समर्पित था। जब नवंबर 19 को लिंकन इस कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे