' मंजिल तक पहुँचने के कई अलग-अलग रास्ते हो सकते हैं, हो सकता है एक रास्ते से मंजिल पाने में बरसों लग जाये और वहीं दूसरे मार्ग से वो कुछ ही दिनों में हासिल हो जाये... ' जब जॉर्ज हैरिसन के गीत 'देहरादून' की ये लाइन सुनो तो समझ आ जाता है कि वो सिर्फ सड़क की बात नहीं कर रहे, बल्कि उसके बहाने ज़िंदगी के बारे में बोल रहे हैं; देहारादून उनके लिए कोई शहर नहीं बल्कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा का एक पड़ाव है। जब १९६८ में बीटल्स ने खुद को खोजने और पाने की इच्छा से ऋषिकेश में अपना समय बिताया तो उन्होने कई गीत रचे, कुछ कहते हैं तैंतीस गीत थे तो दूसरे अनुमान अड़तालीस की बात करते हैं, लेकिन जो एक बात खुद 'द बीटल्स' के सदस्यों ने मानी थी तो वो यही कि ऋषिकेश में बिताया उनका समय - उनकी रचनात्मकता का शिखर था; वो प्रकृति की गोद में बैठे, दैवीय वातावरण में सांस लेते हुए एक के बाद एक गीत रचते चले गए.... और उसी समय जॉर्ज हैरिसन ने 'देहरादून' रचा। ये गीत कभी किसी एल्बम का हिस्सा नहीं रहा, संभवतः हैरिसन के सनातन की ओर झुकाव ने इस रत्न को अलग ही रहने दिया।