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Animesh Anant Books

Animesh Anant · Raagbhopali

मेरी पुस्तकें

लेखन मेरे लिए किसी पूर्वनिर्धारित योजना का परिणाम नहीं रहा। यांत्रिक अभियांत्रिकी, सॉफ्टवेयर और वित्तीय बाज़ारों की दुनिया से गुज़रते हुए जो अनुभव संचित हुए, वे धीरे-धीरे शब्दों में ढलते गए। रोज़मर्रा के जीवन, रिश्तों और समाज को एक अलग कोण से देखना, मानवीय मनोविज्ञान की परतें खोलना और जटिल कथा-संरचना तैयार करना — यही इस लेखनी की धुरी है। अब तक सात पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

संदेश: उपन्यास एवं कहानी संग्रह का आवरण

संदेश: उपन्यास एवं कहानी संग्रह

अस्तित्व प्रकाशन · ISBN 9789370027312 · 380 पृष्ठ

लेखन-यात्रा की पहली कृति। इसमें एक पूर्ण उपन्यास और पाँच कहानियाँ साथ हैं। ‘संदेश’ केवल एक यात्रा की कहानी नहीं है। यह आत्मखोज, इतिहास की गहराइयों और उस शाश्वत सत्य की तलाश है जो आस-पास ही मौजूद रहता है, पर अक्सर अनदेखा रह जाता है।

गोवा के तट पर, निराशा के किनारे, लहरों के साथ आई एक बोतल और उसमें छिपा एक रहस्यमयी संदेश — यही वह क्षण है जो केंद्रीय पात्र का जीवन बदल देता है। प्राचीन संकेत, प्रतीक और व्यक्तिगत घाव मिलकर एक ऐसी यात्रा रचते हैं जो बाहर के इतिहास से भीतर की पहचान तक जाती है। संग्रह की कहानियों में तुरंग, सीतया: युद्धम्, रेड सिग्नल, क्वीन और 0.38 शामिल हैं।

वज़ीर शृंखला

पाँच खंडों में फैली यह औपन्यासिक गाथा प्रांतीय भारत को एक बौद्धिक शतरंज की बिसात में बदल देती है। किशनगंज की गलियाँ, गोविंदघाट की नौकरशाही और वासुपुर की औद्योगिक धड़कन — इन पृष्ठभूमि पर सत्ता, अपराध, मातृत्व, ज्ञान और आत्मसम्मान की परतें खुलती हैं।

केंद्र में है अलंकृता। 1990 के दशक के उत्तरार्ध में एक प्रांतीय कस्बे की आपराधिक और राजनीतिक हिंसा से प्रताड़ित एक साधारण युवती, जो जीवन और दर्शन की कसौटी पर तपकर एक ऐसी निर्भीक रणनीतिकार बनती है जिसकी थाह पाना आसान नहीं। युवावस्था में अल्पन या कृति के नाम से जानी जाने वाली यह स्त्री पूरी शृंखला की रीढ़ है। साथ चलती है माँ आराधना की मौन, अडिग ममता। हर खंड शतरंज की एक चाल है — प्यादे की पहली बलि से लेकर अंतिम शह-और-मात तक। शृंखला क्रम से पढ़ी जाए तो पूरी व्यूहरचना खुलती है।

वज़ीर: मोहरा का आवरण

वज़ीर: मोहरा

शृंखला, खंड 1 · अस्तित्व प्रकाशन · ISBN 9789376860395

प्यादे का पहला कदम और अस्तित्व की जंग। अलंकृता जीवन से बहुत अधिक नहीं चाहती — केवल सम्मान के साथ जीने का अधिकार। पर कुछ लोगों के लिए यह भी विलासिता है। राजनीति की बिसात पर हर चाल एक धुंध है; वहाँ किसी भी बात का वक्त से पहले और ज़रूरत से ज़्यादा समझ में आ जाना ही उसकी नाकामी है। वहाँ बाहुबल बस एक औज़ार है जिसे माहिरों के हाथ में ही होना चाहिए—औज़ार यदि खुद फैसले लेने लगे, तो उसे हथियार बनते समय नहीं लगता। किशनगंज में स्थानीय अपराधी, संरचनात्मक भ्रष्टाचार और विश्वासघात के बीच एक ऐसी चाल चल दी जाती है जो सब कुछ बदल देती है।

यह केवल अपराध या राजनीतिक थ्रिलर नहीं है। छोटे शहरों का सामाजिक यथार्थ, सत्ता और अपराध का गठजोड़, और ज्ञान की शक्ति — यहाँ सबसे बड़ा हथियार शक्ति नहीं, ज्ञान है। असली सवाल यह है कि वास्तव में यहाँ वज़ीर कौन है, और मोहरा किसे समझा गया था?

वज़ीर: स्लेपनीर का आवरण

वज़ीर: स्लेपनीर

शृंखला, खंड 2 · अस्तित्व प्रकाशन · ISBN 9789376861927

व्यवस्था के विरुद्ध सीधी नहीं, बल्कि तिरछी और अचूक छलांग। अलंकृता एक साधारण शिक्षिका के रूप में जीना चाहती है, पर परिस्थितियाँ उसे उस सत्ता-खेल के बीच ले आती हैं जहाँ सम्मान अर्जित नहीं, हासिल करना पड़ता है। वह समझ चुकी है कि जीवन केवल मेहनत और प्रतिभा का खेल नहीं है—यहाँ सत्ता के अपने नियम होते हैं, महत्वाकांक्षा की अपनी भूख, रिश्तों की अपनी जटिलताएँ और मनुष्य के भीतर छिपी इच्छाओं की अपनी राजनीति। इस खेल में दृश्य गढ़े जाते हैं और परिस्थितियों को अपने हिसाब से मोड़ने का खेल खेला जाता है।
यहाँ हर मुस्कान के पीछे रणनीति है, हर निर्णय किसी बड़े दाँव का हिस्सा। लेकिन क्या होता है जब गढ़ा गया दृश्य ख़ुद ही जीवित हो उठे और अपने कलाकार को चुनौती देने लगे? ‘सच’ इतिहास को नहीं बदल सकता, लेकिन ‘लगभग सच’ इतिहास और भविष्य दोनों को बदल सकता है। जब प्यादा वज़ीर बनने की राह पर निकलता है, तो वह केवल घर नहीं बदलता, वह सब कुछ बदल देता है।

वज़ीर: बिसात का आवरण

वज़ीर: बिसात

शृंखला, खंड 3 · अस्तित्व प्रकाशन · ISBN 9789376861910 · 333 पृष्ठ

कॉरपोरेट और राजनीतिक मोर्चों पर महासंग्राम। यह खंड केंद्रीय टकराव की बजाय पार्श्व नियंत्रण और जमीनी गठबंधनों की सूक्ष्म ज्यामिति अपनाता है। बिसात बिछ चुकी है। चालें अब व्यक्तिगत अस्तित्व से आगे बढ़कर संस्थागत शक्ति, आर्थिक दबाव और संगठित हितों तक पहुँचती हैं। कौन चाल चल रहा है और कौन केवल मोहरा है — यह प्रश्न और तीखा हो जाता है।

वज़ीर: चक्रव्यूह का आवरण

वज़ीर: चक्रव्यूह

शृंखला, खंड 4 · अस्तित्व प्रकाशन · ISBN 9789376861866 · 279 पृष्ठ

विरोधियों को उन्हीं के जाल में फँसाने की व्यूहरचना। चक्रव्यूह अचानक नहीं बनता। एक निर्णय से शुरू होता है, उसके साथ जुड़ती है महत्वाकांक्षा, फिर स्वार्थ, भय और प्रतिशोध — और अंत में जन्म लेता है एक ऐसा सच जिसे हर व्यक्ति अपने ढंग से पढ़ता है। कहते हैं चक्रव्यूह में प्रवेश आसान है, बाहर निकलना नहीं। यह खंड मनोवैज्ञानिक और कानूनी जाल की गहराई में उतरता है।

वज़ीर: प्रतिदंड का आवरण

वज़ीर: प्रतिदंड

शृंखला, खंड 5 · अस्तित्व प्रकाशन · ISBN 9789376861828 · 295 पृष्ठ

अंतिम शह-और-मात, और एक निश्छल प्रेम की परिणति। अलंकृता अब वह ठंडी, निर्भीक रणनीतिकार है जिसकी हर शांत चाल पीछे खड़े शत्रुओं का दम घोंटने के लिए पर्याप्त है। समानांतर चलती है आराधना की वह ममता जो अपनी संतान के जख्म मिटाने के लिए स्वयं काल बन सकती है।

प्रतिदंड अंध प्रतिशोध नहीं है। यह कर्म की पुनर्स्थापना है — अतीत के आघात साफ करके स्कूल, अस्पताल और विश्वास के नए आधार खड़े करने की कोशिश। दो दशकों से अदृश्य बहती एक कोमल, निष्काम प्रेम-धारा इस अंतिम खंड को मानवीय गरिमा के शिखर तक ले जाती है।

नरसिंह कुटीर का आवरण

नरसिंह कुटीर

अस्तित्व प्रकाशन · ISBN 9789376865031 · 209 पृष्ठ

पचमढ़ी की धुंधली वादियों और देवदार के विशाल वृक्षों के बीच खड़ा ‘नरसिंह कुटीर’ केवल पुरानी याद नहीं है। यह औपनिवेशिक राजनीति, रियासती कूटनीति और दबे हुए राज़ों का मौन साक्षी है — एक ऐसा पावन चबूतरा जहाँ इतिहास और प्रेम की धाराएँ आकर निशब्द संगम रचती हैं।

जीवन के झंझावातों से बचकर अतीत की छाँव में सुकून तलाशते भानवेंद्र जब इस शांत हिल स्टेशन पर पहुँचते हैं, तो उनका सामना उन चरित्रों से होता है जो अपने अधूरे सच और अनकहे अपराधबोध को सँभाले खड़े हैं। लेडी एन के साथ उनका यह साथ शब्दों की सीमा पार कर एक ऐसी यात्रा बन जाता है जो दशकों पुरानी खामोशी को आवाज़ दे जाता है।

Sandesh: A Novel and Collected Stories Cover

Sandesh: A Novel and Collected Stories (English Edition)

Astitva Prakashan · ISBN 9789376864003

'Sandesh' explores the profound intersection of chance, choice, and the search for truth. The journey begins on a moonlit night in Goa, where Anvita, a woman at her lowest ebb, discovers a mysterious message in a bottle. This unexpected encounter ignites a high-stakes expedition that spans the length and breadth of India, transforming her desperate quest for an unknown sender into a profound intellectual awakening. It is a story that proves darkness is not conquered by the sword, but by wisdom.

The exploration of human nature continues through five meticulously crafted stories that peel back the layers of our everyday existence. This collection is more than just a book; it is a call to listen to the messages that life sends our way, often in the most unexpected forms.

लेखक के बारे में

अनिमेष अनंत भोपाल स्थित स्वतंत्र लेखक और उपन्यासकार हैं। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर से यांत्रिक अभियांत्रिकी की शिक्षा के बाद उन्होंने तकनीकी क्षेत्र, सॉफ्टवेयर विकास और वित्तीय बाज़ारों में कार्य किया। औपचारिक साहित्यिक मंचों से पहले उनके विचार इस वेबसाइट और सोशल मीडिया पर आकार लेते रहे। पहली पुस्तक ‘संदेश’ से लेकर ‘वज़ीर’ की पाँच खंडीय गाथा और ‘नरसिंह कुटीर’ तक, उनकी लेखनी मनोवैज्ञानिक गहराई, रणनीतिक कथा-संरचना और मानवीय गरिमा के प्रश्नों पर केंद्रित रही है।

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